द्वि ज्यामिति 1 रेखाएँ और कोण update 18sep24

ज्यामिति
'geometry' शब्द दो ग्रीक शब्दों से बना है:
geo - इसका अर्थ है 'पृथ्वी'
metron - इसका अर्थ है 'माप'
यह गणित की एक शाखा है, जो विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों, जैसे बिंदुओं, रेखाओं, कोणों, सतह (जैसे त्रिभुज, वृत्त, बहुभुज) और ठोस ( घन, गोले, शंकु) के माप, गुणों और संबंधों से संबंधित है।
ज्यामिति का वर्गीकरण
समतल ज्यामिति - समतल ज्यामिति द्वी-आयामी आकृतियों, जैसे रेखा, त्रिभुज, वर्ग, आयत और वृत्त, आदि से संबंधित है। इन आकृतियों को आसानी से कागज पर बनाया जा सकता है।
ठोस ज्यामिति - ठोस ज्यामिति घन, गोला, शंकु, प्रिज्म, आदि जैसी तीन आयामी वस्तुओं के बारे में होती है।
इनके अलावा, गणित की कुछ शाखाएँ हैं जो या तो ज्यामिति से निकटता से संबंधित हैं, या जहाँ हम ज्यामिति की अवधारणाओं को लागू करते हैं।
1- ऊँचाई और दूरी - यहाँ हम ज्यामिति, साथ ही त्रिकोणमिति की अवधारणाओं का उपयोग करते हैं। 2- निर्देशांक ज्यामिति
बिंदु -
जिस आकृति की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई को मापा नहीं जा सकता, उसे बिंदु कहते हैं। यह अतिसूक्ष्म होता है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि इसका कोई आयाम नहीं होता है। एक बिंदु पर बनने वाले सभी कोणों का योगफल 360 डिग्री होता है । दिए गए चित्र में बिंदु o पर बनने वाले पाचों कोणों का योग 360 होगा ।
रेखा - रेखा बिन्दुओ का समूह है जिसकी केवल लम्बाई होती है, रेखा की चौड़ाई एवं मोटाई नहीं होती है। रेखा क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर हो सकती है। इसे बाएं से दाएं या ऊपर से नीचे की ओर खींचा जा सकता है।
रेखा दो प्रकार की होती है 1 सरल रेखा 2 वक्र रेखा
सरल रेखा भी तीन प्रकार की होती है 1 पृथ्वी के अनुसार, 2 अंत बिंदु के अनुसार, 3 दो या दो से अधिक रेखाओ के अनुसार,
1 पृथ्वी के अनुसार - क्षैतिज , ऊर्ध्वाधर
2 अंत बिंदु के अनुसार - किरण , रेखा खंड
किरण - एक रेखा का वह भाग जिसका एक अन्त बिन्दु होता है और वह एक दिशा में अनंत तक विस्तारित होती है।
रेखा खंड - एक रेखा का वह भाग जिसके दो अन्त बिन्दु होते हैं। यह दो बिंदुओं के बीच की सबसे छोटी दूरी होती है और इसकी एक निश्चित लंबाई होती है।
3 दो या दो से अधिक रेखाओ के अनुसार
1 समानांतर रेखाएँ (अप्रतिच्छेदी ) - दो रेखाएँ समांतर तब कही जाती हैं जब वे समतल में किसी बिंदु पर नहीं मिलती हैं या एक दूसरे को नहीं काटती हैं। चित्र में, रेखाएँ PQ और RS एक दूसरे के समांतर हैं, दोनों रेखाओ के बीच की दुरी भी सामान है ।
2 प्रतिच्छेदी रेखाएँ - दो रेखाएँ समतल में किसी बिंदु मिलती हैं या एक दूसरे को काटती हैं, प्रतिच्छेदी रेखाएँ कहलाती हैं । चित्र में, रेखाएँ PQ और RS एक दूसरे केप्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं।
3 तिर्यक रेखा - जब एक रेखा दो या दो से अधिक रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तो उसे तिर्यक रेखा कहते हैं। चित्र में, एक तिर्यक रेखा t तीनो रेखाओं l,m और n को बिंदु 1, 2, 3 पर प्रतिच्छेद कर रही है।
4 संगामी रेखाएं - जब तीन या तीन से ज़्यादा रेखाएं एक ही बिंदु से होकर गुज़रती हैं, तो उन्हें संगामी रेखाएं कहते हैं. इस बिंदु को संगमन बिंदु या संगामी बिंदु कहते हैं ।
कोण
जब दो किरणें एक ही अंत बिन्दु से प्रारम्भ होती है तो एक कोण बनता है। कोण को बनाने वाली दोनों किरणे कोण की भुजाएँ कहलाती हैं और उभयनिष्ठ बिन्दु कोण का शीर्ष कहलाता है।
A कोण के आधार पर कोणों के प्रकार
1 न्यून कोण - 90 डिग्री से कम के कोण को न्यून कोण कहते हैं। 1 से 89 डिग्री तक के सभी कोण न्यून कोण हैं।
2 समकोण - 90 डिग्री के कोण को समकोण कहते हैं।
ज्यामिति में सबसे ज्यादा समकोण काम में आता हैं
समकोण के उपयोग
1 समकोण त्रिभुज में दो भुजा देने पर तीसरी भुजा का मान ज्ञात करने में - ( लम्ब)² + ( आधार )² = ( कर्ण )² (समकोण के सामने की भुजा कर्ण कहलाती है , तथा तीनो भुजाओ में सबसे बड़ी भुजा होती हैं )
2 एक बिंदु कोण में चार समकोण होतें है
3 अधिक कोण - 90 डिग्री से अधिक किन्तु 180 डिग्री से कम के कोण को न्यून कोण कहते हैं। 91 से 179 डिग्री तक के सभी कोण अधिक कोण हैं।
4 सरल कोण / रेखिय कोण / ऋजु कोण - 180 डिग्री के कोण को सरल कोण / रेखिय कोण / ऋजु कोण कहते हैं। इसे बनाना सरल है इसलिए इसे सरल कोण कहते हैं।
5 प्रतिवर्ती कोण - वह कोण जिसका माप 180 से अधिक और 360 से कम या 180 से 360 के बीच में होता है।
6 बिंदु कोण / पूर्ण कोण - 360 डिग्री का कोण बिंदु कोण / पूर्ण कोण कहलाता है , वृत्त में / घडी में बनने वाला कोण
दो कोणों के आधार पर
1 पूरक कोण - यदि किन्ही दो कोणों का योग 90 डिग्री या समकोण के बराबर हो तो दोनों कोण एक दुसरे के पूरक कोण कहलाते हैं ।
उपयोग - किसी समकोण त्रिभुज का तीसरा कोण ज्ञात करने के लिए
उदहारण - 60 का पूरक कोण ज्ञात करो ? 60 में कितना जोड़ें की 90 प्राप्त हो या 90-60 = 30 अथार्त 60 का पूरक कोण 30 होगा ।
अधिक जानकारी के लिए वीडियो का अवलोकन करें
विडियो का लिंक - पूरक कोण
2 सम्पूरक कोण - यदि किन्ही दो कोणों का योग 180 डिग्री या 2 समकोण के बराबर हो तो दोनों कोण एक दुसरे के सम्पूरक कोण कहलाते हैं ।
उपयोग - एक सरल रेखा पर बनाये गए दो कोणों में से किसी किसी एक कोण का मान ज्ञात करने के लिए
उदहारण - 150 का सम्पूरक कोण ज्ञात करो ? 150 में कितना जोड़ें की 180 प्राप्त हो या 180-150=30 अथार्त 180 का सम्पूरक कोण 30 होगा ।
अधिक जानकारी के लिए वीडियो का अवलोकन करें
सम्पूरक कोण
3 आसन्न कोण - दो कोण आसन्न कोण होगें यदि-
चित्र के अनुसार कोण AOB , कोण BOC
(i) यदि उनका उभयनिष्ठ शीर्ष हो
O
(ii) एक उभयनिष्ठ भुजा हो।
OB भुजा
(iii) उनकी वे भुजाएँ जो उभयनिष्ठ नहीं है, उभयनिष्ठ भुजा के विपरित ओर स्थित हो।
भुजा OA, OC
4 रेखिक कोण युग्म - एक सरल रेखा पर बने दो कोण रेखिक कोण युग्म कहलाते है , दोनों कोनो का योग 180 डिग्री होता है ।
5 एक तिर्यक रेखा द्वारा दो समांतर रेखाओ को प्रतिच्छेदीत करने पर बनने वाले कोण
वीडियो लिंक
एक तिर्यक रेखा द्वारा दो समांतर रेखाओ को प्रतिच्छेदीत करने पर कुल 8 कोण बनते है
1 - एकांतर कोण दो समान्तर रेखाओ के बीच में तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बने कोणों में एकांतर कोणों को पहचानने के लिए अंग्रेजी के अक्षर Z (सही या उल्टी) की आकृति बनती दिखे वहां एकांतर कोण बनेगा , एकांतर कोण परस्पर बराबर होतें हैं ।
2 - शीर्षाभिमुख कोण - शीर्षाभिमुख कोण दो समान्तर रेखाओ के बीच में तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बने कोणों में शीर्षाभिमुख कोणों को पहचानने के लिए अंग्रेजी के अक्षर X की आकृति बनती दिखे वहां शीर्षाभिमुख कोण बनेगा , शीर्षाभिमुख कोण परस्पर बराबर होतें हैं X आकृति में जहाँ कोण बन रहा है वही कोण शीर्षाभिमुख कोण है , इसमें आमने सामने के कोण बराबर होतें हैं ।
3 - संगत कोण - दो समान्तर रेखाओ के बीच में तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बने कोणों में संगत कोण एक जैसा व्यवहार करते है जैसे एक कोण रेखा के ऊपर है तो दूसरा भी रेखा के ऊपर होगा, संगत कोण बराबर होतें हैं ।
4- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंत : कोण संपूरक होते है।
5 किसी रेखा के समांतर अन्य दो रेखाएं परस्पर भी समांतर होती है।
कोणों से सम्बंधित प्रश्न हल करने के लिए ऊपर बताये गए अनुसार कोणों की पहचान करें और तदानुसार कोण ज्ञात करें।
बहुभुज - एक समतल सतह पर समित भुजाओं से घरी एक ऐसी ज्यामितीय आकृति है, जिसमे दो भुजा मिलकर एक शीर्ष का निमार्ण करते है. जिसे बहुभुज कहते है. रेखा खंड से घिरी आकृति के प्रत्येक भाग को बहुभुज की “भुजा” कहा जाता है। बहुभुज संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर यानि “बहु + भुज” से बना है, जिसमे “बहु” का अर्थ “अनेक” एवं “भुज” का अर्थ “भुजा” होता है।
सरल शब्दों में, वह आकृति जो तीन या तीन से अधिक भुजाओं या रेखाखंडो से मिलकर बना हो, उसे बहुभुज कहते है. त्रिभुज, चतुर्भुज, पंचभुज, अष्टभुज आदि बहुभुज के उदहारण हैं ।
बहुभुज को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है. लेकिन हम यहाँ चार प्रकार के बहुभुज के विषय में अध्ययन करेंगे -
1 नियमित बहुभुज 2 अनियमित बहुभुज 3 उत्तल बहुभुज 4 अवतल बहुभुज
नियमित बहुभुज
किसी भी बहुभुज के सभी भुजाएँ एवं कोण एक दुसरें से बराबर माप के हो, तो उसे नियमित बहुभुज कहा जाता है. जैसे; वर्ग, समबाहु त्रिभुज आदि।
अनियमित बहुभुज
यदि किसी बहुभुज के सभी भुजाएँ एवं कोण अलग-अलग माप के हो, तो उसे अनियमित बहुभुज कहा जाता है. जैसे; उदाहरण के लिए, विषमबाहू त्रिभुज, आयत, पतंगाकार, आदि ।
उत्तल बहुभुज
वह बहुभुज जिसका प्रत्येक कोण 180 डिग्री से कम हो, उसे उत्तल बहुभुज कहा जाता है। इसके सभी विकर्ण अन्दर की ओर बनते हैं ।
अवतल बहुभुज
यदि किसी बहुभुज के एक या एक से अधिक कोणों का माप 180 डिग्री से अधिक हो, तो उसे अवतल बहुभुज कहा जाता है, इसका एक विकर्ण बाहर की ओर बनता हैं।
1 - बहुभुज के अंतः कोणों का योग = (n – 2) × 180°, (जहाँ n भुजाओं की संख्या है)
2 - समबहुभुज के प्रत्येक अंतः कोण = (n – 2) × 180°/n , (जहाँ n भुजाओं की संख्या है)
3 - समबहुभुज के प्रत्येक बहिष्कोण = 360 / n, (जहाँ n भुजाओं की संख्या है)
4- बहुभुज के कुल बहिष्कोण का योग = 360
5- बहुभुज के विकर्ण की संख्या = n(n – 3)/2, (जहाँ n भुजाओं की संख्या है), दो अक्रमागत शीर्षो को जोड़ने वाली रेखा को विकर्ण कहते हैं।
कुछ सम बहुभुज में भुजाओं की संख्या, विकर्ण, भुजा एवं कोण
विशेष
किसी बहुभुज के अंत: कोणों का योगफल, बाह्य कोणों के योगफल से बड़ा होता है।
त्रिभुज ही एक ऐसा बहुभुज है जिसके अंत: कोणों का योग बाह्य कोणों के योग का आधा होता है।
चतुर्भुज एकमात्र ऐसा बहुभुज है जिसमें बाह्य कोणों का योगफल एवं अतः कोणों का योगफल समान होता है ।
किसी भी बहुभुज में n शीषर्षों को केंद्र से मिलाने पर n त्रिभुज बनेंगे।
अभ्यास प्रश्न हेतु Quizz
त्रिभुज
त्रिकोणमितिय अनुपात
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