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त्रिभुज का सामान्य परिचय
हम त्रिभुज(त्रिकोण) का अध्यन करेंगें , त्रिभुज की परिभाषा , प्रकार,गुण, त्रिभुज के प्रश्न कैसे हल करें आदि पर नियम और अभिग्रह्ती पढेंगें ।
त्रिभुज की परिभाषा अलग अलग स्तर पर अलग अलग बताई गई है जैसे तीन रेखाओ से घिरी बंद आकृति को त्रिभुज कहते हैं या तीन असंरेखीय बिन्दुओ को मिलने से प्राप्त आकृति को त्रिभुज कहते हैं ।
अब मन में सवाल आता हैं की फिर तीन सरेखीय बिन्दुओ को मिलाने से कोनसी आकृति प्राप्त होगी ?
तीन सरेखीय बिन्दुओ को मिलाने से हमे एक सरल रेखा प्राप्त होगी , तीनो बिन्दुओ के मान रेखा को संतुष्ट करेंगें । यदि हमे कोई दो चरो में रेखीय समीकरण दिया हुआ हैं तो हम x और y के तीन तीन मान ज्ञात करेगें तभी हम एक सीधी रेखा खीच सकतें है, केवल दो बिन्दुओ के आधार पर हम सीधी रेखा का निर्धारण नहीं कर सकते।
परिभाषा - तीन रेखाओ से घिरी बंद आकृति को त्रिभुज कहते हैं / तीन असंरेखीय बिन्दुओ को मिलने से प्राप्त आकृति को त्रिभुज कहते हैं, त्रिभुज का संकेत या सिंबल “∆” होता है।
तीनो असंरेखीय बिन्दुओ को त्रिभुज का शीर्ष कहते हैं, त्रिभुज में तीन शीर्ष (A, B, और C) होतें हैं । ।
तीनो असंरेखीय बिन्दुओ में से दो दो बिन्दुओ को मिलाने से त्रिभुज की भुजाये प्राप्त होती है , त्रिभुज में तीन भुजाएं (a,b,c) होती हैं ।
तीनो असंरेखीय बिन्दुओ पर कोण का निर्माण होता हैं, त्रिभुज में तीन अंत : कोण (∠A, ∠B, और ∠C) और तीन बाह्य कोण (एक भुजा को आगे तक बढ़ाने पर बना कोण ) होतें हैं । त्रिभुज के तीनो अंत : कोणों का योग 180 डिग्री एवं तीनो बाह्य कोणों का योग 360 डिग्री होता हैं ।
आइये हम नीचे दिए गए चित्र से त्रिभुज की भुजा, शीर्ष , एवं कोण को समझने का प्रयास करते हैं । यहाँ a,b,c त्रिभुज की भुजाओ की माप को दर्शाते हैं ।
त्रिभुज के एक शीर्ष पर बने अंत : कोण और बाह्य कोण (एक भुजा को आगे तक बढ़ाने पर बना कोण ) का योग 180 डिग्री होता हैं (रेखीय कोण युग्म से ) ।
त्रिभुजो के प्रकार
त्रिभुज को कोणों और भुजाओ के आधार पर वर्गीकृत किया गया हैं -
भुजाओ के आधार पर त्रिभुज के प्रकार
अब भुजाओ की बात करें तो तीन स्थितियां बनती है, तीनो भुजाये अलग अलग हो , तीनो भुजाएं समान हो, कोई दो भुजाएं समान हो
यदि किसी त्रिभुज की तीनो भुजाये अलग अलग हो तो उस त्रिभुज को विषम बाहु त्रिभुज कहतें हैं, तीनो भुजाएं अलग अलग तो तीनो कोण भी भी अलग अलग होगें ।
यदि किसी त्रिभुज की तीनो भुजाएं समान हो तो उसे समबाहु त्रिभुज कहते हैं, तीनो भुजाएं समान है तो तीनो कोण भी समान होगें तथा प्रत्येक कोण 60 डिग्री का होगा ।
यदि किसी त्रिभुज की कोई भी दो भुजाएं समान हो तो उसे सम-द्वि-बाहु त्रिभुज कहते हैं, समान भुजाओं के सामने बने कोण परस्पर बराबर होगें ।
कोणों के आधार पर त्रिभुज के प्रकार - अब यदि हम कोणों के आधार पर त्रिभुज के प्रकार देखे तो त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180 डिग्री होता है अत : यहाँ तीन स्थितियां बनती है, तीनो कोण न्यून कोण हो , एक कोण अधिक कोण हो , तथा एक कोण समकोण हो
1 - न्यूनकोण त्रिभुज - जिस त्रिभुज के तीनों कोण न्यून कोण हो, उसे न्यूनकोण त्रिभुज कहा जाता है. अर्थात जिस त्रिभुज का प्रत्येक कोण 90 डिग्री से कम हो, उसे न्यूनकोण त्रिभुज कहा जाता है।
2- समकोण त्रिभुज - जिस त्रिभुज का एक कोण समकोण हो, वह समकोण त्रिभुज कहलाता है. अर्थात एक कोण 90 डिग्री का तथा शेष दोनों कोण एक दूसरे के पूरक हो, तो वह समकोण त्रिभुज कहलाता है।
समकोण त्रिभुज में कुछ बाते जो हमेशा ध्यान देने योग्य हैं -
1 - पाइथागोरस प्रमेय लागु होती है अर्थात ( कर्ण )² = ( लम्ब)² + ( आधार )²
अब मन में सवाल आता है की कर्ण , लम्ब , आधार की पहचान कैसे करे ?
समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने वाली भुजा अथवा समकोण त्रिभुज की सबसे बड़ी भुजा कर्ण कहलाती है
समकोण त्रिभुज में न्यूनकोण के सामने की भुजा लम्ब कहलाती है, तथा समकोण त्रिभुज में न्यूनकोण बनाने वाली छोटी भुजा आधार कहलाती है।
समकोण त्रिभुज में दोनों न्यून कोण परस्पर पूरक कोण होतें हैं अर्थात दोनों कोणों का योग 90 डिग्री होता हैं ।
3 - अधिककोण त्रिभुज - जिस त्रिभुज का एक कोण अधिक कोण हो, वह अधिककोण त्रिभुज कहलाता है. अर्थात त्रिभुज का कोई भी एक कोण 90 डिग्री से अधिक हो, तो वह अधिक कोण त्रिभुज कहलाता है।
कुछ बाते जो हमेशा याद रखनी हैं , ये बातें हमे त्रिभुज सम्बन्धी प्रश्न हल करने में सहायता प्रदान करती हैं
1 त्रिभुज के तीनों कोणों का योगफल 180, 2 समकोण होता है।
2 समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोण का मान 60 डिग्री होता है।
3 किसी भी त्रिभुज में कम से कम दो न्यून कोण अवश्य होंगें ।
4 समकोण समद्विबाहु त्रिभुज में प्रत्येक न्यून कोण 45 डिग्री का होता हैं ।
5 समद्विबाहु त्रिभुज में दोनों समान भुजाओ के सामने के कोण समान होतें हैं ।
6 त्रिभुज में समान कोणों के सम्मुख भुजा समान होती हैं ।
7 त्रिभुज के तीनों भुजाओं को क्रम से बढ़ाने पर बने सभी बहिष्कोणों का योग 360 डिग्री होता है।
8 त्रिभुज की दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से सदैव अधिक होता है।
9 त्रिभुज की किसी दो भुजाओं का अंतर, तीसरी भुजा से सदैव कम होता हैं ।
10 त्रिभुज की एक भुजा को आगे बढ़ाने पर बनने वाला बहिष्कोण दो सम्मुख अन्त: कोणों के योग के बराबर होता हैं. त्रिभुज का बहिष्कोण किसी भी सम्मुख अन्त:कोण से बड़ा होता हैं ।
11 त्रिभुज का परिमाप - उसकी तीनो भुजाओ का योग होता है। इसलिए त्रिभुज के परिमाप का सूत्र उसकी तीनो भुजाओ का जोड़ (a+b+c) होगा।
12 त्रिभुज का अर्द्ध परिमाप (s) = (a+b+c)/2
13 क्षेत्रफल किसी आकृति द्वारा घेरी गयी जगह को कहते है। समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल = (1/2) X आधार X ऊंचाई
14 यदि हमें किसी त्रिभुज की तीनो भुजाये ज्ञात है अर्थात वह त्रिभुज विषमबाहु त्रिभुज है। तो इसके लिए हम "हीरोन का सूत्र" का उपयोग करते है।
हीरोन का सूत्र = √s(s-a)(s-b)(s-c) , (जहां s त्रिभुज का अर्धपरिमाप है।) s = (a+b+c)/2
15 समबाहू त्रिभुज के क्षेत्रफल का सूत्र √3/4 X ( भुजा )² होता है ।
रेखाएँ और कोण
त्रिकोणमितिय अनुपात
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